
- विनोद मिश्रा
चित्रकूट। एक तरफ चित्रकूट में “मां मंदाकिनी अपने रौद्र रूप” में हैं, “गांव के गांव” डुबो दिया हैं, दूसरी तरफ “बांदा-चित्रकूट की सांसद कृष्णा पटेल” का कहीं “अता-पता” नहीं है ! लोग कह रहे हैं की “मंदाकिनी की बाढ़ तो दिख” रही है, लेकिन “सांसद बाढ़ में ही बह गईं क्या” ?
चित्रकूट “डूब रहा है, बांदा की सीमा तक “हाहाकार” मचा है। “जनता छतों पर है, मवेशी पानी” में हैं, औऱ “जनप्रतिनिधि लापता” ? स्थिति यह हो गई है कि “बाढ़ पीड़ित लोग राहत शिविर में नहीं, बल्कि सांसद को ढूंढ” रहे हैं। “गली-गली” में एक ही पोस्टर की “कमी” है “हमारी सांसद लापता हैं, ढूंढने वाले को इनाम मिलेगा।”
सियासी गलियारों में इस “लापता” होने के भी “मायने” निकाले जा रहे हैं। विरोधी कह रहे हैं की “चुनाव में बड़े-बड़े वादे” कर “वोट” ले लिया, अब जब “जनता को जरूरत” है तो सांसद “वातानुकूलित कोठी” में “विश्राम” कर रही हैं?
स्थानीय लोग तंज कस रहे हैं “रोम जल रहा था, नीरो वंशी बजा रहा था,यहां चित्रकूट डूब रहा है और सांसद लापता हैं !” प्रश्न तो बनता है। बाढ़ आई तो “क्या सांसद ने एक भी गांव का दौरा” किया ? एक भी “पीड़ित के आंसू पोंछे”। प्रशासन को फोन लगा कर “कहा कि मेरी जनता को बचाओ” ?
बांदा-चित्रकूट की जनता अब “बाढ़” से ज्यादा इस “बात से आहत” है कि “मुसीबत” में उनका “चुना हुआ चेहरा” ही “गायब” है। बाढ़ का पानी तो “उतर” जाएगा लेकिन “मुसीबत में कहां थीं सांसद” ? यह “प्रश्न लंबे समय तक सियासत में तैरता” रहेगा !
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