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October 12, 2026
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हनुमंत कथा का चौथा दिन: धीरेंद्र शास्त्री ने जगाई 'आत्मिक चेतना', उमड़ा आस्था का सागर
उत्तर प्रदेश

हनुमंत कथा का चौथा दिन: धीरेंद्र शास्त्री ने जगाई ‘आत्मिक चेतना’, उमड़ा आस्था का सागर

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। बागेश्वर धाम सरकार की हनुमंत कथा के चौथे दिन कथा स्थल ‘श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना’ के ‘महासागर में डूबा’ नजर आया। कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन में भक्तों को जीवन का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि “ढोंग से नहीं, ढंग से जीने पर ही ईश्वरीय कृपा बरसती है।” उनके इन शब्दों ने लाखों श्रद्धालुओं के हृदय को झकझोर दिया और आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

हनुमंत कथा का चौथा दिन: धीरेंद्र शास्त्री ने जगाई 'आत्मिक चेतना', उमड़ा आस्था का सागर

हनुमान जी की भक्ति, राम नाम की महिमा और भक्त के जीवन में उसके प्रभाव को विस्तार से बताते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमान जी सच्ची सेवा, त्याग और समर्पण के प्रतीक हैं। वे केवल संकटमोचक ही नहीं, बल्कि भक्त को प्रभु से जोड़ने वाले सेतु हैं। जिनके हृदय में हनुमान जी का वास होता है, वहां भय, दुःख और निराशा टिक नहीं पाते।

हनुमंत कथा का चौथा दिन: धीरेंद्र शास्त्री ने जगाई 'आत्मिक चेतना', उमड़ा आस्था का सागर

कथा के दौरान शास्त्री जी ने कहा कि आज का मानव दिखावे और पाखंड में उलझ गया है, जबकि ईश्वर सच्चे भाव को पहचानते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि शुद्ध आचरण, संयमित जीवन और निष्कपट भक्ति से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यही हनुमान जी की भक्ति का मूल मंत्र है। राम नाम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि “श्री राम” केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। राम नाम का जाप करने से मन को शांति, बुद्धि को स्थिरता और जीवन को दिशा मिलती है।

हनुमंत कथा का चौथा दिन: धीरेंद्र शास्त्री ने जगाई 'आत्मिक चेतना', उमड़ा आस्था का सागर

उन्होंने कहा कि राम नाम से ही ‘आराम’ मिलता है और संसार के सभी कष्ट स्वतः दूर होने लगते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमान जी की भक्ति करने से भक्त को स्वतः राम जी का सान्निध्य प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि, यश और वैभव की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हनुमान जी की भक्ति को राज्य-पाठ और प्रभु-कृपा का मार्ग कहा गया है। कथा के चौथे दिन का सार यही रहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से राम नाम का जाप करता है, हनुमान जी की सेवा और भक्ति करता है और अपने जीवन को ढंग से जीता है, उसका जीवन स्वतः सफल हो जाता है।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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