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October 14, 2026
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बांदा को चार दशक से नहीं मिला अपना सांसद : आरके पटेल के सामने रिकार्ड बचाने की चुनौती
उत्तर प्रदेश

बांदा को चार दशक से नहीं मिला अपना सांसद : आरके पटेल के सामने रिकार्ड बचाने की चुनौती

  • विनोद मिश्रा

बांदा। चार दशक से बांदा अपने जिला से सांसद बनने के लिये तरस रहा है, लेकिन “बाजी चित्रकूट के हाथ” लग रही है। बांदा – चित्रकूट संसदीय सीट पर अब तक 17 बार हुए लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने 11 बार चित्रकूट या गैर जनपदों के प्रत्याशियों के सिर पर ताज सजाया है। “बांदा के प्रत्याशियों में सिर्फ 6 को सांसद बनने का मौका” मिला है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बांदा या चित्रकूट में से कौन प्रत्याशी निर्वाचित होगा, यह मतगणना के बाद पता चलेगा। हालांकि “चित्रकूट का रिकार्ड बचाने को भाजपा प्रत्याशी आरके पटेल शाम -दाम -दंड -भेद से मतदाताओं को रिझा” रहे हैं।

बांदा को चार दशक से नहीं मिला अपना सांसद : आरके पटेल के सामने रिकार्ड बचाने की चुनौती
Banda has not got its MP for four decades: RK Patel faces the challenge of saving the record

बांदा संसदीय क्षेत्र में 1952 से लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। 90 के दशक में चित्रकूट नया जिला बना। लोकसभा सीट को बांदा चित्रकूट कहा जाने लगा, लेकिन इसके पहले ही लोकसभा क्षेत्र में चित्रकूट का दबदबा था। मतदाताओं के लिहाज से भी चित्रकूट में संख्या कम है,इसके बाद भी चित्रकूट के प्रत्याशी ही ज्यादातर लोकसभा चुनाव में सफल होते रहे हैं।

बांदा को चार दशक से नहीं मिला अपना सांसद : आरके पटेल के सामने रिकार्ड बचाने की चुनौती
Banda has not got its MP for four decades: RK Patel faces the challenge of saving the record

सबसे पहले 1952 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान फतेहपुर के निवासी शिवदयाल उपाध्याय सांसद बने थे। दूसरा चुनाव 1957 में हुआ, जिसमें कालाकांकर रियासत के राजा दिनेश सिंह के सिर ताज सजा। 1962 में कांग्रेस की सावित्री निगम,1967 में भाकपा के जागेश्वर यादव,1971 में जनसंघ से रामरतन शर्मा, 1977 में जनता पार्टी से अंबिका प्रसाद पांडे, 1980 में कांग्रेस से रामनाथ दुबे और आखरी बार 1984 में कांग्रेस के भीष्म देव दुबे निर्वाचित हुये।

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इस तरह छह बार बांदा के लोगों को सांसद बनने का मौका मिला। 1984 के बाद बांदा का कोई भी लोकसभा चुनाव जीतने में नाकाम रहा। 1989 में बसपा के राम सजीवन, 1991 में भाजपा के प्रकाश नारायण त्रिपाठी, 1996 में बसपा के राम सजीवन, 1998 में भाजपा के रमेश चंद्र द्विवेदी, 2004 में सपा के श्याम चरण गुप्ता, 2009 में सपा के आर के सिंह पटेल, 2014 में भाजपा के भैरव प्रसाद मिश्र और 2019 में भाजपा के आर के सिंह पटेल निर्वाचित हुए।

बांदा को चार दशक से नहीं मिला अपना सांसद : आरके पटेल के सामने रिकार्ड बचाने की चुनौती
Banda has not got its MP for four decades: RK Patel faces the challenge of saving the record

इनमें रमेश चंद्र द्विवेदी मूल रूप से कौशांबी जिले के रहने वाले हैं। अब इस बार देखना यह है की भाजपा प्रत्याशी आरके पटेल भगवान कामता नाथ के आशिर्वाद से जीत का परचम फहरा चित्रकूट की बल्ले -बल्ले कराते हैं या सांसद के लिये सिसकता “बांदा जिला इस बार अपनी मनोकामना पूर्णता की किलकारी” मारता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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