
- विनोद मिश्रा
बांदा। झांसी-प्रयागराज खंड स्नातक विधान परिषद “चुनाव का परिणाम” आते ही भारतीय जनता पार्टी के खेमे में “सन्नाटा” है, क्योंकि “यह हार सिर्फ एक प्रत्याशी की नहीं, बल्कि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा की हार” मानी जा रही है !
भाजपा के “भीतरखाने” से आ रही “खबरों के अनुसार” उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उरई निवासी अशोक राठौर को “टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी” का जोर लगा दिया था। संगठन में कई अन्य नामों पर सहमति बन रही थी, लेकिन केशव मौर्य की “हठ के आगे किसी की नहीं” चली।
इस “सीट का भूगोल” समझें तो, इसमें “दस जिले” आते हैं, झांसी, जालौन, ललितपुर, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी और फतेहपुर। इनमें “सबसे अधिक मतदाता प्रयागराज और कौशांबी” में हैं, जो “केशव मौर्य का गृह और प्रभाव क्षेत्र” है। यहीं से भाजपा को “सबसे बड़ी बढ़त की उम्मीद थी, लेकिन यहीं पर पार्टी सबसे ज्यादा पिछड़” गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केशव मौर्य का यह “दांव उल्टा पड़” गया। स्नातक मतदाता “किसी हठयोग से नहीं, बल्कि अपनी पसंद से वोट” करता है। स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी अशोक राठौर को “बाहर का प्रत्याशी” मानकर “नाराजगी” थी। इसका “सीधा लाभ” समाजवादी पार्टी के डॉ मान सिंह को मिला और यह “साबित” हो गया कि “जबरन थोपा गया टिकट ही भाजपा की इस करारी हार का कारण” बन गया।
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